नई दिल्ली, 1 अगस्त। ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल (CWG 2026) में भारतीय एथलीट तेजस्विन शंकर ने पुरुषों की डेकाथलॉन स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया। उनकी इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच X के माध्यम से बधाई देते हुए कहा कि भारतीय खिलाड़ी लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर देश का नाम दुनिया भर में रोशन कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में तेजस्विन शंकर के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने डेकाथलॉन के सभी दस इवेंट में शानदार संतुलन और क्षमता का प्रदर्शन किया। उन्होंने खिलाड़ी को भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि वह आने वाले वर्षों में भी इसी तरह भारत के लिए गौरव हासिल करते रहेंगे।
तेजस्विन शंकर की यह सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने बेहद चुनौतीपूर्ण डेकाथलॉन स्पर्धा में भारत के लिए ऐतिहासिक पदक जीता। डेकाथलॉन को एथलेटिक्स की सबसे कठिन प्रतियोगिताओं में गिना जाता है, जिसमें खिलाड़ियों को दो दिनों के दौरान दस अलग-अलग स्पर्धाओं में अपनी क्षमता साबित करनी होती है। लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी को ही कुल अंकों के आधार पर विजेता घोषित किया जाता है।
ग्लासगो में तेजस्विन ने शुरुआत से ही दमदार प्रदर्शन किया और अंत तक अपनी लय बनाए रखी। प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने कई स्पर्धाओं में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। इसके साथ ही वह राष्ट्रमंडल खेलों की डेकाथलॉन स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए।
इस उपलब्धि को और भी प्रेरणादायक बनाने वाली बात यह रही कि तेजस्विन पिछले कुछ समय से घुटने की चोट से जूझ रहे थे। चोट के बावजूद उन्होंने प्रतियोगिता से पीछे हटने के बजाय पूरे आत्मविश्वास के साथ सभी दस स्पर्धाओं में हिस्सा लिया। मुकाबले के बाद उन्होंने स्वीकार किया कि यह सफर आसान नहीं था और कई बार उन्होंने खेल छोड़ने तक का विचार किया था, लेकिन लगातार मिले समर्थन और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने वापसी की और इतिहास रच दिया।
प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश ऐसे समय आया जब राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ी लगातार पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन हर देशवासी के लिए गर्व का विषय है और उनकी मेहनत युवाओं को खेलों की ओर प्रेरित करती है।
तेजस्विन शंकर की उपलब्धि पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी उन्हें बधाई दी। राष्ट्रपति ने इसे भारतीय एथलेटिक्स के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि इस सफलता से देश के युवा खिलाड़ियों को नई प्रेरणा मिलेगी और आने वाले वर्षों में भारत एथलेटिक्स में और मजबूत होकर उभरेगा।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि तेजस्विन शंकर का यह पदक केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। लंबे समय तक ऊंची कूद में अपनी पहचान बनाने वाले तेजस्विन ने बहु-स्पर्धा प्रतियोगिता में भी खुद को साबित कर दिखाया है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारतीय खिलाड़ी अब पारंपरिक स्पर्धाओं के अलावा चुनौतीपूर्ण इवेंट्स में भी विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता रखते हैं।
ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए तेजस्विन शंकर का कांस्य पदक सिर्फ पदकों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने भारतीय खेल जगत को एक नई प्रेरक कहानी भी दी। चोट, कठिन परिस्थितियों और मानसिक चुनौतियों के बावजूद उनका यह प्रदर्शन आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास का उदाहरण माना जाएगा।

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